प्रस्तावना
पुलिस एवं न्यायपालिका की भाँति कारागार व्यवस्था आपराधिक न्याय प्रणाली का महत्वपूर्ण अंग है। शान्ति व्यवस्था एवं कानून के शासन की स्थापना में योगदान करके समाज में सन्तुलन स्थापित करने में कारागारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभ्यता के विकास के साथ कारागारों के भौतिक एवं कार्यात्मक स्वरूप में परिवर्तन हुआ है। कारागार व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य एवं क्रियाकलाप निम्नवत हैं जिनके निरंतर संचालन से बंदियों को पुनर्वास हेतु तैयार करने तथा अपराध भाव से विरत करने के प्रयास किये जाते है विभाग के क्रिया–कलापों में बंदी सुधार को रेखांकित करते हुए शासन स्तर पर विभाग का नाम "गृह (कारागार)" के स्थान पर ‘कारागार प्रशासन एवं सुधार’ एवं विभाग स्तर पर "कारागार विभाग" के स्थान पर ‘कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं’ किया गया है।
उद्देश्य
- कारागारों में बन्दियों का सुरक्षित रख रखाव
- बंदी सुधार, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं पुर्नवास
- बंदियों के मानव अधिकारों की सुरक्षा
- बंदियों के खान–पान एवं रहन–सहन में सुधार
- बंदी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
- कारागार सुरक्षा व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
- जिला कारागारों का निर्माण एवं बैरकों का निर्माण/नवीनीकरण
- लोक अदालतों का आयोजन एवं बंदियों को नि:शुल्क विधिक सहायता
- चिकित्सा व्यवस्था में सुधार
- कारागारों के रसोई घरों का आधुनिकीकरण
- बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं देय पारिश्रमिक की दरों में वृद्धि
- सुरक्षित मुलाकात गृह निर्माण
- बंदियों की सुरक्षा एवं संचार व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
- कारागारों में साक्षरता अभियान
- कारागारों में बंदियों के लिये कम्प्यूटर प्रशिक्षण
कारागार की संस्थाएं
प्रदेश में विभिन्न श्रेणी की 71 कारागारें क्रियाशील हैं। इनमें केन्द्रीय कारागार-05 (आगरा,बरेली,फतेहगढ़,नैनी,वारणसी), जिला कारागार-61, उप कारागार-02 (देवबंद तथा महोबा), आदर्श कारागार लखनऊ-01,नारी बंदी निकेतन लखनऊ-01 तथा 01 किशोर सदन बरेली सम्मिलित हैं।