कारागार उद्योग
मुख्य उद्देश्य
कारागारों में स्थापित उद्योगों के संचालन का मुख्य उद्देश्य कारागारों में बंदियों की आवश्यकतानुसार सामग्री के उत्पादन के साथ-साथ बंदियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे कारागार से रिहाई के उपरान्त स्वावलम्बी बनकर अर्जित कार्य कर कुशलता से जीवन यापन कर सकें। कारागारों में स्थापित उद्योगों से उत्पादित सामग्री से विभागों की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ मांग के अनुसार अन्य सरकारी / गैर सरकारी विभागों में इसकी आपूर्ति की जाती है। कारागारों में उत्पादित सामग्री दरी, चादर, गमछे, डस्टर तथा फिनायल आदि वस्तुएं की बिक्री कारागार स्तर पर एवं अमीनाबाद लखनऊ में स्थापित जेल डीपो के माध्यम से आम जनता को भी की जाती है।
प्रमुख उद्योग 05 केन्द्रीय कारागारों- आगरा, बरेली, फतेहगढ़, नैनी तथा वाराणसी और जिला कारागार उन्नाव में क्रियाशील है। कारागारवार उत्पादित होने वाली सामग्री का विवरण निम्नवत है:-
| क्र0सं0 | कारागार का नाम | संचालित उद्योगों का नाम |
| 1 |
केंद्रीय कारागार, आगरा |
1. साबुन 2. फिनायल 2. जूता एवं चप्पल 4. दरी बुनाई 5. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 2 |
केंद्रीय कारागार, नैनी |
1. कम्बल 2. दरी 3. कपड़ा बुनाई 4. साबुन 5. फिनायल 6. फर्नीचर 7. लौह उद्योग 8. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 3 |
केंद्रीय कारागार, बरेली |
1. कम्बल उद्योग 2. दरी उद्योग 3. फर्नीचर 4. लौह उद्योग 5. पेन्ट 6. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 4 |
केंद्रीय कारागार, वाराणसी |
1. पीतल 2. स्टील बर्तन उद्योग 3. दरी, 4. कपड़ा बुनाई 5. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 5 |
केंद्रीय कारागार, फतेहगढ़ |
1. तम्बू उद्योग 2. रंगाई छपाई 3. निवाड़ 4. लौह 5. काष्ठ 6. दरी 7. पावरलूम 8. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 6 |
आर्दश कारागार, लखनऊ |
1. पावरलूम उद्योग 2. चादर 3. हस्त निर्मित कागज 4. प्रिटिंग प्रेस 5. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) |
| 7 |
नारी बंदी निकेतन, लखनऊ |
1. कढ़ाई 2. बुनाई 3. सिलाई 4. मसाला पिसाई |
| 8 |
जि0का0, उन्नाव |
1. सिलाई उद्योग (बंदी वस्त्र/बंदीरक्षक वर्दी) 2. दरी उद्योग |